Welcome To Fissure Treatment in Delhi

फिशर क्या है?

गुदा या गुदा नलिका में जब किसी प्रकार का कट या दरार बन जाती है, तो उसे फिशर या एनल फिशर (Anal fissures) कहा जाता है। फिशर अक्सर तब होता है, जब आप मल त्याग के दौरान कठोर और बड़े आकार का मल निकालते हैं। फिशर के कारण आमतौर पर मल त्याग करने के दौरान दर्द होना और मल के साथ में खून भी आता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की जीवनशैली कुछ ऐसी हो गयी है की लोगो को बवासीर से ज्यादा फिशर हो रहा है, फिशर के कारण आमतौर पर मल त्याग करने के दौरान दर्द होना और मल के साथ में खून भी आता है। फिशर के दौरान आपको अपनी गुदा के अंत में मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती है। फिशर छोटे बच्चों में काफी सामान्य स्थिति होती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है।

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Anal Fissure

एनल फिशर के प्रकार(Types of Anal Fissure)

फिशर के सामान्य तौर पर दो प्रकार होते हैं:

  • तीव्र (Acute) - त्वचा की ऊपरी सतह पर छेद या दरार को एक्यूट फिशर कहा जाता है।
  • दीर्घकालिक (Chronic) - अगर त्वचा की सतह पर हुआ छेद या दरार ठीक ना हो पाए, तो समय के साथ-साथ क्रॉनिक फिशर विकसित होने लगता है।

एनल फिशर के लक्षण ( Anal Fissure Symptoms)

फिशर के लक्षण व संकेत क्या हो सकते हैं?

गुदा में फिशर के लक्षण व संकेतों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • मल त्याग के दौरान दर्द, कभी-कभी गंभीर दर्द होना।
  • मल त्याग करने के बाद दर्द होना जो कई घंटों तक रह सकता है।
  • मल त्याग के बाद मल पर गहरा लाल रंग दिखाई देना।
  • गुदा के आसपास खुजली या जलन होना।
  • गुदा के चारों ओर की त्वचा में एक दरार दिखाई देना।
  • गुदा फिशर के पास त्वचा पर गांठ या स्किन टैग दिखाई देना। देना।

एनल फिशर के कारण (Resion of Anal Fissure)

गुदा व गुदा नलिका की त्वचा में क्षति होना फिशर का सबसे सामान्य कारण होता है। ज्यादातर मामलों में यह उन लोगों को होता है, जिनको कब्ज की समस्या होती है। विशेष रूप से जब कठोर व बड़े आकार का मल गुदा के अंदर गुजरता है, तो वह गुदा व गुदा नलिका की परतों को नुकसान पहुचा देता है।

फिशर के अन्य संभावित कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • आप बड़े मल पास करते हैं।
  • >लंबे समय तक कब्ज रहना ।
  • आप बार-बार दस्त करते हैं ।
  • आप एक बच्चे को जन्म देते हैं।
  • लगातार डायरिया (दस्त) रहना।
  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज(IBD), जैसे क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • यौन संचारित संक्रमण जो गुदा व गुदा नलिका को संक्रमित और नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • एनल स्फिंक्टर की मांसपेशियां असामान्य रूप से टाइट होना।

रेक्टल परीक्षाएं, गुदा संभोग या विदेशी वस्तु सम्मिलन भी फिशर्स का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में, क्रॉन की बीमारी एक फिशर का कारण बन सकती है। कुछ डॉक्टरों का मानना है कि स्पिन्टरर तनाव फिशर्स का कारण बन सकता है। आंतरिक गुदा स्फिंकर नियंत्रित नहीं है जबकि बाहरी स्फिंकर को इच्छानुसार नियंत्रित किया जा सकता है।

इस प्रकार इस मांसपेशियों में बहुत तनाव होता है। अगर दबाव बहुत अधिक हो जाता है, तो यह एक स्पैम का कारण बन सकता है और रक्त प्रवाह को कम कर देता है जिससे फिशर होता है। यह दबाव मौजूदा फिशर के लिए उपचार प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। डॉ. के. के. मिश्रा शारीरिक परीक्षा और लक्षणों के आधार पर गुदा फिशर का निदान (Fissure Treatment)करने में मदद करते है।

एनल फिशर से बचाव (Prevention of Anal Fissure)

आप कब्ज की रोकथाम करके एनल फिशर विकसित होने के जोखिमों को कम कर सकते हैं। अगर पहले कभी आपको फिशर की समस्या हुई है, तो कब्ज की रोकथाम करना बहुत जरूरी है।

आप निम्न की मदद से कब्ज की रोकथाम कर सकते हैं:

  • एक संतुलित आहार खाएं, जिसमें अच्छी मात्रा में फाइबर, फल और सब्जियां शामिल होती हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीएं।
  • नियमित रूप से व्यायाम करते रहें।
  • शराब व कैफीनयुक्त पदार्थों (चाय और कॉफी) का सेवन करें।

पाचन तथा आंतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए ये सभी अच्छी बातें हैं, जो कब्ज की रोकथाम करने में मदद करती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप मल त्याग करने के बाद अपने गुदा को धीरे-धीरे पोंछें।

जब शौचालय जाने की इच्छा महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि आंतों को खाली ना करना बाद में कब्ज का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आंतों में जमा होने वाला मल कठोर बन जाता है, जो गुदा के अंदर से गुजरने के दौरान दर्द व गुदा में दरार (खरोंच) पैदा कर कर सकता है।

टॉयलेट में अधिक देर तक ना बैठें और अधिक जोर ना लगाएं। ऐसा करने से गुदा नलिका में दबाव बढ़ता है। अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, जो फिशर होने के जोखिम को बढ़ाती है, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं। वे आपसे इस बारे में बात करेंगे कि इस स्थिति को कैसे मैनेज करना है और एनल फिशर होने के जोखिमों को कैसे कम करना है।

एनल फिशर का इलाज (Anal Fissure Treatment)

ज्यादातर अल्पकालिक फिशर 4 से 6 सप्ताह में उपचार के द्वारा ठीक कर सकते हैं। मल त्याग करने के दौरान होने वाला गुदा का दर्द भी इलाज शुरू होने के कुछ दिन बाद ठीक हो जाता है।

कुछ ऐसे स्टेप्स जिनकी मदद से आप लक्षणों को कम कर सकते हैं और फिशर को ठीक कर सकते हैं:

  • कब्ज की रोकथाम करने की कोशिश करें, उदाहरण के लिए:
    • अपने रोजाना के आहार में फल, सब्जियां, सेम और साबुत अनाज आदि शामिल करें। ये खाद्य पदार्थ फाइबर में उच्च होते हैं।
    • खूब मात्रा में तरल पदार्थ पीएं।
    • रोजाना थोड़ा व्यायाम करें।
    • फाइबर वाले सप्लीमेंट्स लें।
    • रोजाना मल त्याग करने के लिए एक ही समय निर्धारित करें, पर्याप्त समय लें और जोर ना लगाएं।
  • मल त्याग के दौरान दर्द को कम करने के लिए मल को नरम करने वाले उत्पाद (Stool softener) या लैक्सेटिव (Laxatives) आदि का प्रयोग करें। अपने डॉक्टर से पूछें की आप लैक्सेटिव का इस्तेमाल कब तक कर सकते हैं।
  • एक टब में गर्म पानी डालें और उसमें 20 मिनट तक बैठें, ऐसा दिन में 2 या 3 बार करें। इस प्रक्रिया को सिट्ज़ बाथ कहा जाता है। यह क्षतिग्रस्त ऊतकों के दर्द को कम करता है और अंदरुनी स्फिंक्टर को रिलेक्स महसूस करवाता है। सिट्स बाथ में गर्म पानी से नहाया जाता है, यह गुदा की सफाई और उसे ठीक करने में मदद करता है। इस दौरान पानी में सिर्फ कुल्हे और नितंब ही डूबने चाहिए।
  • अपने डॉक्टर से पूछें कि कुछ समय के लिए जिंक ऑक्साइड (Zinc oxide) या 1% हाइड्रोकोर्टिसोन (1% Hydrocortisone) जैसी बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर से मिलने वाली क्रीम आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। या नहीं।
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पाचन तथा आंतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए ये सभी अच्छी बातें हैं, जो कब्ज की रोकथाम करने में मदद करती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप मल त्याग करने के बाद अपने गुदा को धीरे-धीरे पोंछें।

जब शौचालय जाने की इच्छा महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि आंतों को खाली ना करना बाद में कब्ज का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि आंतों में जमा होने वाला मल कठोर बन जाता है, जो गुदा के अंदर से गुजरने के दौरान दर्द व गुदा में दरार (खरोंच) पैदा कर कर सकता है।

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Fissure is a cut injury which arises in anal canal. Passage of hard seat consequences in too much stretching of anal canal which causes tear in this province. Anal fissure starts at the inaugural of anus and in a minimum time it binges in the anal canal.

Fissure can happen in both men and women of any age. About 81% of people around the world at some time in life have some kind of anal fissures. Therefore, it is considered as a common problem. The fissure can be painful and may bleed. An anal fissure is a hurting crack in the facing of the anal canal that may cause rectal bleeding. While this disorder may be uncomfortable to talk. It may cause itching, pain or bleeding. Fissures can spread mounting into the lower rectal mucosa; or extend downward causing a swollen skin tag to develop at the anal verge, also known as a sentinel pile. For Fissure Treatment in Delhi visit our clinic which is located in kalkaji south Delhi. Dr. K. K. Mishra provide world class Fissure Treatment in Delhi NCR.

What are the symptoms of a Fissure?

  • Pain in Anal Area, It will intensification after transitory the stool.
  • Bleeding тАУ Seat Comes with some Blood
  • Burning and itch that may be painful
  • Smelling Discharge
  • Blood тАУ Since the blood is new, it will be optimistic red and may be observed on the stools or the toilet paper. Anal fissures in infants commonly bleed. Children may be worried at the sight of bright-red blood in their stools or toilet paper.
  • Itching тАУ In the anal area. The sensation may be intermittent or persistent.
  • Dysuria тАУ Discomfort when urinating (less common). Some patients may urinate more frequently.
  • Pus тАУ A malodorous (bad smelling) discharge of pus may come from the anal fissure.

Fissure Treatments in Delhi

The Fissure Treatments Doctor will ask about your medical history and will perform a physical test, which will include a gentle inspection of anal region. Most of the times the tear is visible. This is the Fissure test which is done for the fissure diagnosis. A fissure is considered chronic if it lasts for more than eight weeks. The location of the fissure offers clues about the cause. A fissure bleeding which occurs on the side of the anal opening is likely to be a sign of CrohnтАЩs disease. The Fissure Treatment doctor will recommend these fissures test for the diagnosis:

Anoscopy: An anoscope is a tubular device which is inserted into the anus to help the doctor visualize the anus and rectum.

Flexible sigmoidoscopy: In this process, the fissure treatment doctor will insert a thin tube into the bottom portion of your colon. This test is done when you are younger than 50 and have no risk factors for colon cancer.

Colonoscopy: The Fissure Treatment Doctor will insert a flexible tube into the rectum which will inspect the entire colon. This test is done when you are older than 50 years of age or if you have a risk of colon cancer and signs of other conditions.

Anal Fissure Treatment Specialist

Doctor K.K. Mishra is one of the Best Fissure Treatment Doctor in Delhi NCR, provide word class Fissure Treatment in Kalkaji Govindpuri, South Delhi. He will give you Best Anal fissure Treatment, He have 18 years above experience & we are using latest technologies for Anal Fissure Treatment in over the Delhi Ncr.